मथुरा

फागुन में मचेगा होरी को हुडदंग

श्रद्धालुओं को मिलेगा संत समागम में शामिल होने का सौभाग्य

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मथुरा। 28 फरवरी यानी रविवार से फागुन मास की शुरू आत हो गयी है। फागुन मास को मस्त महीने के तौर पर जाना जाता है। इस मस्ती को महसूस करने और देखने के लिए ब्रज से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती है। इस बार होली खेलने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को वृंदावन के कुंभ मेला (संत समागम) में भाग लेने और यमुना स्नान करने का भी सौभाग्य मिलेगा। इस वर्ष यह मास 28 फरवरी 2021 से लेकर 28 मार्च 2021 तक रहेगा। सब जग होरी या ब्रज होरा। यहां होली ही नहीं हुरंगा भी होता है। लठामार होली भी होती है और लड्डू होली भी खेली जाती है। पहाड से श्रद्धालुओं पर लड्डू बरसाये जाते हैं, तो श्रद्धाभाव से श्रद्धालु राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ फूलां की होली भी खेलते हैं। होली कर हर रंग ब्रज में देखने को मिलता है। होली की मस्ती में श्रद्धा और भक्ति का भाव सर्वोपरि रहता है।

नंदगांव, बरसाना, मथुरा, बल्देव, जाव, फालेन में होली के अपने अपने अलग रंगे देखने को मिलते हैं। मठ मंदिरों में बसंत पंचमी से ही गुलाल उडना शुरू हो गया है। मंदिरों में परंपरागत होली खेली जा रही है। बसंत पंचमी से 40 दिन तक उत्सव की धम मंदिरों में रहती है। होली के प्रमुख आयोजनों में 21 मार्च सोमवार को फाग आमंत्रण उत्सव नंदगांव में मनाया जाएगा। 22 मार्च को लड्डु होली व होली की द्वितीय चैपाई बरसाना होगी। 23 मार्च को बरसाना का रंगीली गली में लठामार होली खेली जाएगी। इसके अगले दिन 24 मार्च को नंदगांव में बरसाना के हुरियारे लठामार होली खेलेंगे। बरसान और नंदगांव की लठामार होली ब्रज की होली का चरमोत्कर्ष होता है। 25 मार्च को रावल में लठामार होली का आयोजन होगा। रावल राधरानी का गांव हैं। इसी दिन यानी 25 मार्च को ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और फूलों की होली का आयोजन होगा। इसे देखने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

श्री द्वारकाधीश मंदिर में भी होली इसी दिन खेली जाएगी। इसके अगले दिन 26 मार्च को श्रद्धालुओं को होली का बेहद अलग और अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। कान्हा के गांव गोकुल में गोपियां यमुना तट पर बालक कृष्ण के साथ छडीमार होली खेलेंगी। कलकल करती यमुना का तट और भक्तिभाव से सराबोर होली का दृष्य अद्भुत होता है। 28 मार्च को होलिका दहन होगा। इस दिन होली गेट पर होलिका पूजन और फालैन में जलती हुई होली से पंडा का निकलेगा मुख्य कार्यक्रम होते हैं। यह दोनों कार्यक्रम रात में होते हैं। इससे पहले दिन में श्रीद्वारिकाधीश मंदिर से होली डोला का नगर भ्रमण होगा। 29 मार्च को मठमंदिरों के साथ साथ समूचे ब्रज में दुल्हडी खेली जाएगी। 30 मार्च को श्रीकृष्ण के बडे भाई और मल्लविद्या के गुरू भगवान बलभद्र होली खेलेंगे। बल्देव के दाउजी मंदिर में श्रद्धालुओं को हुरंगा देखने को मिलेगा। जाव, नंदगांव, मुखराई आदि में हुरंगा और चरकुला नृत्य के कार्यक्रम होंगे। इसके बाद बैठेन, गिडोह आदि गांवों में हुरंगा होते हैं। यह क्रम अलग अलग गांवों में कई दिन तक चलता है। इस बीच संस्थाओं के होली मिलन समारोह भी निरंतर चलते रहते हैं।

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