मथुरा

विदेशियों को भी चढ रहा है मथुरा में गांजे का नशा

पचायत चुनावों में शराब से ज्यादा गांजे की मांग

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मथुरा। मथुरा के देहात मंे गांवों में कहावत थी शराब करे खराब, शराब से परिवार उडने की बात होती थी, पर अब गांजा बस्तियां उजाड रहा है। गांजे की लत युवाओं में सिर चढ कर बोल रही है। गांजे के प्रभाव की व्यापकता का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि लोकगीतों में गांजा रसने बसने लगा है। पंचायत चुनावों मंे इस बार शराब से ज्यादा गांजे की मांग है।  इसके लिए बडे पैमाने पर तस्करी शुरू हो गई है। उडीसा से गांजे की तस्करी हो रही है। मथुरा में विदेशी महमानों के सिर चढ कर गांजे का नशा बोल रहा है। मथुरा आ रही 4 कुंतल 58 किलो गांजे की खेप को फिरोजाबाद पुलिस ने मथुरा पहुुंचने से पहले ही पकड लिया। जिसकी कीमत बाजार में करीब 2.5 करोड आंकी गई है। एसएसपी फिरोजाबाद के मुताबिक पकड़े गए नशे के सप्लायर मथुरा में विदेशी लोगों को इसकी सप्लाई करते थे। इस बार सप्लाई करने से पहले ही पकड़े गए। गिरफ्तार तस्करों में महेश, बादल, सत्यभान, कन्हैयालाल पाण्डेय तथा अश्वनी कुमार पांच मथुरा के हैं। जबकि विष्णु, कुन्ना टूडू तथा माधव सिंह तीन उडीसा के हंै। पिछले साल 13 अगस्त को आगरा एसटीएफ ने 505 किलो गांजे के साथ तीन गांजा तस्करों को दबोचा था। तीनों तस्करों ने आगरा पुलिस को बताया था कि गांजा मथुरा के दो ड्रग्स पैडलर ने मंगाया था। यह माल मथुरा के बल्देव में रहने वाले रविंद्र और  धु्रव जाट के यहां पहुंचाना था। 11 मई को एसओजी और शेरगढ पुलिस ने 386 किलो गांजे के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया था। बाजार मंे इसकी कीमत उस समय करीब 40 लाख रूपये आंके गई थी। 8 मार्च को छाता पुलिस और एसओजी टीम ने एनएच टू से 375 किलो गांजे के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया था। इस तरह की बडी खेप अक्सर पकडी जाती रही हैं। पुलिस छुटपुट गांजा बेचने वालांे को पकड कर इतश्री करती रही है। बडे डीलरों और सप्लायरांे पर मथुरा पुलिस ने हाथ नहीं डाला हॅै। जो बडी कार्रवाई हुई हैं वह पडोंसी जनपद की पुलिस ने की हैं। यह कहावत भी पुरानी हो चली है कि गांजा बेचने वाले पुलिस के कमाऊ पूत हैं, इस लिए इन पर कभी भी उस दर्जे की सख्त कार्रवाही नहीं हो सकती कि जिससे कि इनके पैर उखड जाएं।

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