आगरा

भाई बहिन के अटूट प्रेम का प्रतीक होता हैं भाई दूज का पर्व

भाईयों का तिलक कर बहनों ने की लंबी आयु की कामना

liladhar pradhan 1000

 

आगरा- पांच दिवसीय दीपोत्सव महोत्सव का अंतिम दिन भैया दूज के रूप के मनाया जाता है। सोमवार को भाई दूज के पर्व की धूम जिले भर में देखने को मिली। बहनों ने अपने भाई का विधि विधान से तिलक किया और निस्वार्थ से उसकी लंबी उम्र की कामना की तो भाई ने भी उसकी रक्षा का वचन दिया। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उन्हें लंबी उम्र का आशीष देती हैं और इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन कर भाई के दीर्घायु की कामना करती है। भाई दूज मनाए जाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी। बताया जाता है कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ल का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है। भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज का पर्व क्षेत्र में काफी श्रद्धा धूमधाम के साथ परम्परागत ढंग से मनाया गया। अधिकांश बहनों ने अपने भाइयों के यहां जाकर दूज की रस्म अदायगी की तो तमाम भाइयों ने भी बहिनों के घर पहुंच कर दूज करवायी और बहनों को उपहार भी दिए। भाई दूज के त्योहार पर जो बहने किसी परिस्थितियों बस अपने भाइयों को दूज खिलाने नहीं जा सकी उन्होंने अपनी ससुराल में ही गरी के गोलों का तिलक कर भाई दूज की रस्म अदायगी की।

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