आगरा

शिव तांडव स्त्रोत के साथ शुरू हुई लंकापति रावण की पूजा

liladhar pradhan 1000

 

आगरा : उत्तर प्रदेश में रावण दहन के प्रचलन को जड़ से समाप्त करने के लिये सारस्वत समाज द्वारा चलाये जा अभियान का आज से आगाज हो चुका हैं। आज के कार्यक्रम में लंकापति दशानन महाराज रावण पूजा समिति द्वारा आवास विकास कॉलोनी सेक्टर 7 मे लंकापति रावण के चित्र पर माल्यार्पण व तिलक कर शिव तांडव स्त्रोत के साथ पूजा अर्चना की गई कार्यक्रम समिति के संयोजक डॉ मदन मोहन शर्मा ने कहा कि लंकापति महाराज दशानन रावण की विनम्रता भी अनुकरणीय वेद शास्त्रों का ज्ञाता, महान लेखक व कलाप्रेमी होने के साथ-साथ रावण की विनम्रता भी कुछ अवसरों पर अनुकरणीय मानी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर जब भगवान राम को शिवलिंग की स्थापना के लिये विद्वान ब्राह्मण की आवश्यकता थी तो स्वयं रावण वहां बतौर ब्राह्मण उपस्थित हुए। साथ ही जब लक्ष्मण मूर्छित थे तो अपने वैद्य को भी उन्होंनें लक्ष्मण का इलाज करने की अनुमति दी। समिति अध्यक्ष एडवोकेट उमाकांत सारस्वत ने बताया कि पूरी लंका के मुक्तिदाता स्वयं दशानन रावण बने। रावण और कुंभकरण के बारे में यह भी माना जाता है कि वह भगवान विष्णु के द्वारपाल जय-विजय थे जिन्हें श्रापित होकर असुर के रुप में जन्म लेना पड़ा। श्राप से मुक्ति दिलाने के लिये ही लगातार तीन जन्म में भगवान विष्णु को भी उनका वध करने के लिये अवतरित होना पड़ा। रावण एक विद्वान ब्राह्मण था उसे संसार की नश्वरता व ईश्वर की अमरता का भान था। वह जानता था कि भगवान विष्णु के हाथों मृत्यु को पाकर ही मोक्ष मिल सकता है इसलिये उसने स्वयं के साथ-साथ पूरी लंका को यह मुक्ति दिलाई थी। कुल मिलाकर बहुत सी ऐसी बाते हैं जिनके अनुसार रावण के जीवन से भी हम बहुत कुछ सीख ले सकते हैं। समिति सदस्य अमन सारस्वत नकुल सारस्वत ने कहा कि भले ही रावण में बुराइयां भी रही हों लेकिन उसकी अच्छाइयों को भी हम नजरंदाज नहीं कर सकते। रावण के तप, उसके ज्ञान को भी झुठला नहीं सकते। इस कार्यक्रम में समिति संयोजक डॉ मदन मोहन शर्मा, एडवोकेट उमाकांत सारस्वत, नकुल सारस्वत, अमन सारस्वत, अभिषेक गर्ग ,श्रीकांत दीक्षित, अमन भदौरिया, विक्रांत शर्मा, पावनी सारस्वत, युक्ति शर्मा, सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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