आगरा

कोरोना चैंपियन के साथ भेदभाव करना एक सामाजिक बुराई : सीएमओ

liladhar pradhan 1000

 

आगरा : 55 वर्षीय हिना (बदला हुआ नाम) के 56 वर्षीय पति की तबियत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया गया। कोविड-19 की जांच कराई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई। डॉक्टर ने हिना के पति को अस्पताल में भर्ती कर लिया और उन्हें भी अपनी जांच कराने के लिये कहा। उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। उन्हें कोई लक्षण न होने के कारण होम आइसोलेशन में ही उपचार दिया गया। अब उन्हें पति की सेहत की भी चिंता थी और उनके साथ घर में रह रहे बेटे की भी चिंता सता रही थी. लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा दुखी उनके साथ हुए सामाजिक व्यवहार ने किया। हिना बताती हैं कि उनके होम आइसोलेट होने पर स्वास्थ्य विभाग ने उनके दरवाजे पर होम आइसोलेशन का फ्लायर लगा दिया। इस पर पड़ोसियों ने न तो कोई संवेदना जताई, बल्कि उनके साथ भेदभाव किया। उन्होंने बताया कि पड़ोसियों ने उनके घर दूध देने वाले दूधिये से कहा कि वह हमारे घर दूध न दें क्योंकि हमारे पूरे परिवार को कोरोना हो गया है। उन्होंने दूध वाले को भी धमकी दी कि वह यदि हमारे घर दूध देगा तो वह अपने घर उनसे दूध लेना बंद कर देंगे। इसी प्रकार से अन्य सेवा देने वाले लोगों को भी उनके पड़ोसियों ने धमकी दी। इससे बीमारी के दौरान उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई और उन्हें ज्यादा परेशानी उठानी पड़ीं। उन्होंने बताया कि अब वह और उनका परिवार पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है और उनकी रिपोर्ट भी निगेटिव आ चुकी है इसके बावजूद भी उनके साथ इस प्रकार का भेदभाव जारी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि कोविड-19 को मात देने वालों के साथ सामाजिक भेदभाव करना वैज्ञानिक और मानवीय दोनों दृष्टिकोण से उचित नहीं है। चैंपियंस ने ऐसे वायरस को हराया है जो कि किसी को भी और कभी भी हो सकता है, इसमें उनका कोई ऐसा दोष नहीं है जिसके लिए उनके साथ सामाजिक भेदभाव किया जाए। वह भी हमारे समाज और परिवार के अभिन्न अंग हैं और इन विषम परिस्थितियों में जब वह कोरोना के कारण तनाव और चिंता में हैं तो उनको मानसिक संबल प्रदान करना सभी का नैतिक दायित्व बनता है। सीएमओ का कहना है कि कोरोना को हराने के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आने चैंपियंस का अगर करीबी दिल से स्वागत करें और उनका हालचाल जानें तो वह बहुत जल्दी ही चिंता और तनाव से उबर सकते हैं । इस दौरान ऐसे कई उदाहरण देखने को भी मिल रहे हैं जहाँ पर चैंपियंस के अस्पताल से लौटने पर सोसायटी या आस-पड़ोस के लोगों ने फूल बरसाकर उनका एक योद्धा के रूप में स्वागत भी किया है। इससे समाज में उनका मनोबल बढ़ेगा और वे दोबारा से अपने दैनिक जीवन में वापस आ सकेंगे।

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