आगरा

कोविड-19 से करें बचाव, न लें मानसिक दवाब-डॉ. अंशु चौहान

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आगरा-कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के इस दौर में छह-सात माह के दौरान लोगों की जिन्दगी में तमाम तरह के बदलाव आये हैं द्य लोग अपने कैरियर और आगे की जिन्दगी को लेकर चिंतित हैं, ऐसे में मन में तरह-तरह के विचार आना स्वाभाविक है लेकिन उनको यह भी सोचना चाहिए कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती या इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक धैर्य रखकर पूरी सतर्कता बरतने में ही भलाई है। मनोवैज्ञानिक डॉ. अंशु चौहान बताती हैं कि जब जीवन में तेजी से बदलाव होता है तो मन में कई सवाल आते हैं। महामारी के इस दौर में लोग उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं, बच्चों, बजुर्गों और बीमारों के लिये ये वक्त और ज्यादा चुनौती भरा हो गया है। ऐसे में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। तनाव को दूर करके कोविड-19 से बचाव के उपायों का अनुकरण करने की जरूरत है। मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। डॉ. अंशु चौहान के मुताबिक़ आप कुछ तरीक़ों से ख़ुद को शांत रख सकते हैं ताकि आप स्वस्थ रहें- ख़ुद को मानसिक रूप से मज़बूत करना ज़रूरी है। आपको ध्यान रखना है कि सबकुछ फिर से ठीक होगा और पूरी दुनिया इस कोशिश में जुटी हुई है। बस धैर्य के साथ इंतज़ार करें। अपने रिश्तों को मज़बूत करें। छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मानें। एक-दूसरे से बातें करें और सदस्यों का ख़्याल रखें। निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें। बुजुर्ग घर से बाहर न निकलें। लेकिन, छत पर, खिड़की पर, बालकनी या घर के बगीचे में आकर खड़े हों। सूरज की रोशनी से भी हमें अच्छा महसूस होता है। अपनी दिनचर्या को बनाए रखें। इससे हमें एक उद्देश्य मिलता है और सामान्य महसूस होता है। हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें। एक महत्वपूर्ण तरीक़ा यह है कि इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करें। मनपसंद काम जो समय न मिलने के कारण आप ना कर पाए हों। इससे आपको बेहद ख़ुशी मिलेगी जैसे कोई अधूरी इच्छा पूरी होगी। अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करना। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें। जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और ज़ाहिर करें, लेकिन वो ग़ुस्सा कहीं और ना निकालें। भले ही आप परिवार के साथ घर पर रह रहें हो फिर भी अपने लिए कुछ समय ज़रूर निकालें। आप जो सोच रहे हैं उस पर विचार करें। अपने आप से भी सवाल पूछें। जितना हो पॉजिटिव नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करें। सबसे बड़ी बात बुरे वक़्त में भी अच्छे पक्षों पर ग़ौर करना है। जैसे अभी महामारी है,लेकिन इस बीच यदि आपके पास वक्त है तो इसे अपने परिवार के साथ बिताने के लिए, अपनी हॉबी पूरी करने के लिए इस्तेमाल करें।

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