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बुजुर्गो को बढ़ती उम्र के साथ हो सकती है भूलने की बीमारी

बृद्ध आश्रम मे मनाया गया विश्व अलजाइमर दिवस

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मिशन इंडिया न्यूज़ संवाददाता -विक्रम पांडेय

कासगंज – राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के द्वारा सोमवार को नई हवेली स्तिथ बृद्धआश्रम मे सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विश्वव अल्जाइमर दिवस मनाया गया, साइकेट्रिक नर्स अरुण कुमार ने बताया की प्रतिवर्ष 21सितम्बर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है । इसका मुख्य उदेश्य बुजुर्गो की देखभाल तथा स्वास्थ्य सम्वन्धी अधिकार आदि के बारे मे जागरूक करना है। यह बीमारी मुख्यत भूलने की बीमारी के नाम से जानी जाती है, इस बीमारी के प्रमुख लक्षण बृद्धावस्था मे जरूरत से ज्यादा भूलना, एकाग्रता की कमी बेचौनी के साथ साथ चीजों के रखरखाव मे कमी आदि है द्ययह बीमारी मुख्यत बृद्धवस्था मे होते है लेकिन हम लोग इसकी रोकथाम युवावस्था से ही करें तो कहीं हद तक इस बीमारी को रोका जा सकता है । बहुत सी बीमारियों जिनमे डिमेंशिया जैसी स्तिथि उतपन्न हो जाती है, अगर उसी अवस्था मे उनका इलाज किया जाय तो बुढ़ापे मे अल्जाइमर बीमारी होने की कम सम्भवना होती है ।

इस बीमारी के प्रमुख वचाव के लिए नियमित और अच्छी दिनचर्या, व्यायाम, संतुलित आहार लेना, दैनिक तथा साप्ताहिक स्वास्थ्य परिक्षण करना जरूरी है । यदि किसी व्यक्ति को भूलने की आदत बढ़ती जा रही है तो अल्जाइम की और बढ़ना हो सकता है, इसमें प्रारम्भिक अवस्था मे व्यक्ति एक या दो महीने मे जो घटनाए हुई है। उनको भूल जाता है, धीरे धीरे 10से 15दिन मे जो घटनाएं उसके साथ हुई है, उनको भूलने लगता है इसके बाद मे पांच से छ दिन पुरानी बातों को भी व्यक्ति भूलने लगता है फिर चौवीस घंटे की घटना को भी भूलने लगता है यह अवस्था हल्के लछणों से शुरू होती है और गंभीर रूप ले लेती है अर्थात व्यक्ति 1या 2 मिनट पहले हुई घटना को भूलने लगता है और उसकी एकाग्रता शत प्रतिशत समाप्त हो जाती है इसी अवस्था को अल्जाइमर कहा गया है इसका सम्पूर्ण इलाज सम्भव नहीं है द्य अस्थयी इलाज अपनी दिनचर्या नियमित करके योग व्यायाम करके तथा मनोचकित्स्क की परामर्श लेकर किया जा सकता है इसलिए जरूरी है कि इस बीमारी के लोगों को जल्दी से जल्दी से उनके घर वाले उनकी पहचान करें और उनको मनोचिकित्स्क से यथासम्भव परामर्श कराएं और उनकी दैनिक क्रियाओ का ध्यान रखें दूसरा इस बीमरी मे बृद्धों के मौलिक अधिकारों का भी ध्यान रखें जैसे स्वास्थ्य का अधिकार सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार, और अपनी बात और अभिव्यक्ति रखने का अधिकार आदि अधिकारों का भी बुजुर्ग के घर वालों को ध्यान रखना चाहिए द्य सईकेट्रिक्स नर्स अरुण कुमार ने बताया कि सरकार के द्वारा बृद्ध लोगों के लिए बहुत सारी योजनए चलाई जा रही है तथा उनकी उचित क्रियावन्ती भी लोगों को करनी चाहिए बृद्धों को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए ।

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