मथुरा

एक के बाद एक जिले में होते रहते हैं सरकारी जमीन पर अबैध कब्जे

शासन व कोर्ट के निर्देशों को दिखाया जांच के नाम पर ठेंगा , आखिर कैसे थमेगा अबैध अतिक्रमण व कब्जा ?

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मिशन इंडिया न्यूज़ संवाददाता-पवन शर्मा

मथुरा-उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अबैध कब्जों का चलन तेजी से चल रहा हैं। इन अबैध कब्जों को हटाने के लिये प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने कई बार जिला प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किये कि जिलों में सरकारी जमीनों पर अबैध अतिक्रमण व कब्जों को मुक्त कराया जाय लेकिन जिला प्रशासन इन अबैध कब्जों को लेकर गंभीर नही हैं। उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में सरकारी जमीनों पर अबैध कब्जे पूर्व में तो थे लेकिन कुछ नये कब्जे भी संज्ञान में आ रहे हैं। जिन पर जिला प्रशासन जांच के नाम पर केवल काम कर रहा हैं जबकि हकीकत में कब्जा हटाने का तनिक भी प्रयास नही कर रहा हैं। ऐसे ही मामलों में उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा का बरसाना क्षेत्र के रिठौरा गांव में खसरा नंबर 176 में स्थापित श्री चद्रावली सखी कुंड के कुछ हिस्से को मौजूदा प्रधान व पर्यटन विभाग द्वारा पंचायत घर व सार्वजनिक शौचालय तथा क्षेत्रीय दबंगों द्वारा अबैध अतिक्रमण कर लिया जिसकी %4िकायत क्षेत्रीय लोगों ने शासन प्रशासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट में कब्जा मुक्त कराने की अपील की हैं। लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही व जांच के नाम पर महज खानापूर्ति में लगे होने के कारण बार-बार गलत आख्या देकर शासन व सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का कार्य किया रहा हैं। इस मामले क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि इस क्षेत्र में खसरा नंबर 176 व 177 तथा 178 और 193, 128, 139 सहित कई खसरों पर अबैध कब्जा किया जा चुका लेकिन शिकायतों पर जिला प्रशासन की जांच के अलावा कोई कार्यवाही नही हो रही।

स्थानीय लोगों के अनुसार बताया जा रहा हैं कि अबैध कब्जें में सर्वाधिक भूमिका मौजूदा ग्राम प्रधान तहसीलदार व कानूनगों तथा लेखपाल और प्रधान के सहयोगी गणों की बताई जा रही हैं। उक्त प्रकरण को लेकर हमारे आगरा मंडल प्रभारी ने उप जिलाधिकारी गोर्बधन से फोन के माध्यम से जानकारी मांगी तो उनका कहना था तहसील क्षेत्र में इस तरह के हजारों मामले हैं हर मामले को मैं फोन के माध्यम से नही बता सकता कार्यालय व तहसीलदार से संपर्क करने को कहा जानकारी के लिये आपको बता दे कि उप जिलाधिकारी राहुल यादव जी को तकरीबन एक साल होने को जा रही हैं इस कब्जे का मामला सुप्रीम कोर्ट में विवादित होने के बाद भी और कब्जा मुक्त कराने के आदेश से महोदय अनभिज्ञ हैं। इसको क्या कहा जाय समझ नही आया ? क्या प्रशासन इस तरह कार्य करता हैं कि बहुप्रचलित जानकारी भी फाइलों में क्यों दबी रहती हैं जो सवाल बना हुआ हैं ?

इस कब्जे को लेकर ग्रामीणों से जानकारी ली तो उनका कहना था कि ग्राम प्रधान व पर्यटन विभाग ने अबैध पंचायत घर बनाकर सदियों से बने धार्मिक स्थल श्री चद्रावली सखी कुंड के आस्तित्व को खत्म करने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही लोगों का कहना था कान्हा की नगरी में जब धार्मिक स्थल ही नही होगें तो पर्यटको का आगमन कैसे होगा। साथ ही कहा कि ग्राम प्रधान व पर्यटन विभाग ने उक्त कुंड का काया पलट किया हैं जिसकी सजा उनको मिलनी चाहिये। साथ ही इस मामले में क्षेत्रीय जनता ने प्रदेश सरकार से मांग की कि सदियों से बने धार्मिक स्थल की जमीन पर अबैध कब्जों से मुक्त कराया जाय ताकि मथुरा नगरी के लिये हिंदुओं की आस्था बनी रहे।

 

 

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