मथुरा

मथुरा की ज्योति, दिग्विजय और गौरव बनेंगे एसडीएम और डिप्टी एसपी

तीनों बेटे बेटियों के अलावा कई अन्य मेधावी बच्चों ने यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास

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मिशन इंडिया न्यूज़ संवाददाता-पवन शर्मा  

मथुरा– उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग पीसीएस-2018 की परीक्षा में मथुरा के कई बेटे और बेटियों ने भी आज अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। इसमें कु. ज्योति, दिग्विजय सिंह और गौरव सिंह के नाम उल्लेखनीय हैं। 976 पदों का अंतिम परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। इस परीक्षा में टॉप तीन पोजीशन पर लड़कियां आयी हैं। इनमें मथुरा की होनहार बेटी ज्योति शर्मा ने तीसरा स्थान पाया है। यह बालिका मथुरा जनपद के ग्राम मानागढ़ी (मांट) की है। यह छात्रा बहुत ही मेधावी निकली। दिन-रात इसने पढाई पर ध्यान दिया था। यह बेटी अब एसडीएम बन जाएगी। मथुरा के गांव सिहोरा (राया) निवासी नेत्रपाल सिंह का बेटा दिग्विजय सिंह (24 वर्ष ) भी उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन में 94 वीं रेंक लेकर आया है। यह एसडीएम बनेगा। दिग्विजय सिंह का परिवार टाउनशिप के समीप ओकारेश्वर कालोनी में रहता हैं। पिता नेत्रपाल सिंह केंद्रीय विद्यालय के अवकाश प्राप्त शिक्षक हैं।

मथुरा के वरिष्ठ पत्रकाA4 भारतेंदु सिंह के बेटे गौरव सिंह ने भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की है। वह डिप्टी एसपी बनेंगे। गौरव शुरू से ही अफसर बनने के लक्ष्य को लेकर दिन रात मेहनत करता रहा। उसका आज नतीजा डिप्टी एसपी बनने की रैंक पाकर पूरा हुआ है। कु.ज्योति, दिग्विजय और गौरव के अलावा मथुरा से कई अन्य मेधावी युवक-युवती भी उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में पास हुए हैं। अब ये सभी अधिकारी बनेंगे। इस प्रतिष्ठा पूर्ण परीक्षा में पानीपत की रहने वाली कु.अनुज नेहरा को पहला, गुरुग्राम की कु.संगीता राघव को दूसरा और मथुरा की कु. ज्योति शर्मा को तीसरा स्थान मिला है। चौथे स्थान पर जालौन के विपिन कुमार शिवहरे रहे हैं। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग पीसीएस-2018 के अंतिम रिजल्ट में 988 पदों के सापेक्ष 976 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।

यूपी पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा वर्ष 2019 में 18 से 22 अक्तूबर तक आयोजित हुई थी। पहली बार यह परीक्षा नए पैटर्न पर आयोजित की गई थी। पीसीएस प्री के अलग-अलग सात ग्रुप में 199 महिला अभ्यर्थियों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ देते हुए मुख्य परीक्षा के लिए सफल किया गया। इनमें से 39 महिला अभ्यर्थी ऐसी थीं, जो एक से अधिक ग्रुप में सफल हुई हैं। इसलिए सफल महिला अभ्यर्थियों की वास्तविक संख्या 160 है।

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