मथुरा

उत्सवों को कोरोना ने ‘लीला, अबकी ‘रामभरोसे शहर की रामलीला

liladhar pradhan 1000

मिशन इंडिया न्यूज़ संवाददाता-पवन शर्मा

मथुरा/कोसीकला : कोरोना महामारी के चलते शहर का ऐतिहासिक श्रीराम भरतमिलाप मेला एवं रामलीला पर इस बार आशंकाओं के बादल छाए हुए हैं। कारोबार के साथ धार्मिक अनुष्ठान, उत्सवों को महामारी की नजर लगी है। शारदीय नवरात्रि की भक्ति के बीच होने वाली रामलीला पर भी कोरोना संकट की लीला भारी पड़ती दिख रही है। इसके चलते अक्तूबर में होने वाली रामलीला भी रामभरोसे है। रोजाना बढ़ते संक्रमण के मामलों के चलते असमंजस बरकरार है। कोसीकलां में श्रीराम भरतमिलाप, रामलीला का इतिहास दशकों पुराना है। यह पहली बार हो रहा है कि रामलीला के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कुछ भी कहना संभव नहीं है। अक्तूबर तक कोरोना का प्रभाव कितना कम या ज्यादा होगा, इस पर आयोजक मंडल की नजरे टिकी हैं। रामलीला आयोजक मंडल से जुड़े लोग बताते हैं कि सावन के महीने से ही तैयारियां का सिलसिला शुरू हो जाता था, लेकिन कोरोना के कारण अब तक रामलीला संस्थान की बैठकें नहीं हो पाई हैं। आयोजन की संभावना बहुत ही कम ही है। रामलीला संस्थान के लोग असमंजस की स्थिति में है। वह तय नहीं कर पा रहे है कि क्या करें, क्या न करें। प्रशासन की अनुमति पर संशय होने से रामलीला के आयोजन पर कोरोना की तलवार लटक रही है। रामलीला का मंचन और श्रीराम भरत मिलाप मेला देखने बड़ी संख्या में दर्शक आते हैं। वर्तमान हालातों को देखते हुए कलाकार भी संशय की स्थिति में हैं।

इन त्योहारों व पर्वों पर लगा कोरोना का ग्रहण

पिछले छह महीनों से सभी त्योहार और उत्सव कोरोना की वजह से फीके-फीके से बीत रहे है। सबसे पहले चैत्र नवरात्र कोरोना की भेंट चढ़ गए। उसके बाद ईद, सावन, बकरीद, रक्षाबंधन, नागपंचमी, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, स्वतंत्रता दिवस, मोहर्रम, शिक्षक दिवस आदि धार्मिक व राष्ट्रीय आयोजनों पर कोरोना का साया रहा और अब रामलीला पर भी कोरोना वायरस का संकट मंडरा रहा है।

कोरोना में आर्थिक प्रबंधन का भी संकट

कोरोना महामारी ने रामलीला आयोजन के लिए न केवल बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं बल्कि प्रशासनिक अनुमति और आर्थिक प्रबंधन जैसी अनेक समस्याओं को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है। कोरोना काल में लोगों का कारोबार चैपट हो गया है। जिस कारण आयोजक मंडल को आर्थिक सहयोग जुटाने में भी परेशानी होगी।

मलमास के कारण मिल गया एक महीना का वक्त

यूं तो शहर में होने वाली रामलीला पितृपक्ष विदाई के बाद रावण की सवारी के बाद गणेश पूजन के साथ शुरू हो जाती है, लेकिन जब मलमास पड़ता है तो एक महीना बढ़ जाता है। इस बार में मलमास पढ़ने के कारण शारदीय नवरात्र के एक दिन पहले रामलीला को प्रारंभ होना है।

बोले आयोजक मंडल के संयोजक

अगर बढ़ा सौ का दायरा तब कुछ बनेगी बात, शासन की गाइडलाइन के मुताबिक धार्मिक आयोजनों में 100 लोगों की ही मौजूगी की छूट है। आयोजक मंडल के लोग दर्शकों का दायरा बढ़ने उम्मीद किए हैं। अगर शासन की ओर से धार्मिक आयोजनों पर 100 से अधिक लोगों की छूट दी गई तो कुछ रामलीला आयोजन को लेकर बात कुछ बात बन सकती है।

फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराना आसान बात नहीं

श्रीरामलीला संस्थान के संयोजक कमल किशोर वार्ष्णेय बताते हैं कि कोरोना के चलते वर्तमान हालात को देखते हुए इस वर्ष रामलीला का आयोजन मुश्किल दिख रहा है। यदि आगे हालात सामान्य हुए तो देखेंगे। चूंकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना आसान बात नहीं है। शासन-प्रशासन के फरमान को ध्यान में रखते हुए आगे निर्णय लिया जाएगा।

शासन-प्रशासन की गाइडलाइन का होगा पालन

रामलीला संस्थान के संयोजक कमल किशोर वार्ष्णेय बताते हैं कि कोरोना के चलते अब तक बैठक नहीं हो सकी है। सभी संभावनाओं पर चर्चा के बाद बैठक में तय किया जाएगा रामलीला होगी या नहीं। महामारी के चलते सभी पहलुओं पर सोचना होगा फिर शासन की जो गाइडलाइन आएगी उसका पालन किया जाएगा।

Related Articles

Back to top button
Close