आगरा

बृजभाषी कॉमेडी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले लुक्का

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मिशन इंडिया न्यूज़ संवाददाता-  मुकेश चौहान

आगरा – ब्रजक्षेत्र में एक समय था सी. डी. कैसेट का और उसी सी.डी. में एक देहाती कॉमेडी फिल्म आई ‘ लुक्का चला ससुराल ’ ये फिल्म इतनी सुपर हिट हुई कि पूरे बृजक्षेत्र के घर-घर में  और बच्चे – बच्चे के मुँह पर एक ही नाम आता था लुक्का – लुक्का – लुक्का… लोग अपने बच्चों का नाम तक लुक्का रखने लगे थे | औरतें जिन्हें बहुत प्यार करती उन्हें इसी लुक्का नाम से पुकारतीं | मुझे बहुत अच्छे से याद है, जहाँ कहीं भी लुक्का का कैसेट बजा लोग इकट्ठा होना शुरु हो जाते थे | हालांकि यह कॉमेडी फिल्म पढे-लिखे समाज के लिये एक महाफूहडपन थी | पर अश्लील बिल्कुल नहीं थी और उसी पढे लिखे समाज में नंगापन बडे गर्व के साथ पसंद किया जाता है | लेकिन लुक्का की महाप्रसिद्धि ने बडे-बडे वॉलीबुड के दिग्गजों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। जी हाँ हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश के जनपद  एटा, निवासी शिवभान सिंह शिवम उर्फ न्यूटन लुक्का ने इसके बाद तो कॉमेडी फिल्मों की झड़ी लगा दी और 80 से अधिक क्षेत्रीय बृजभाषी कॉमेडी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया | और फिर एक दिन अचानक से लुक्का गायब हो गया | अफवाहयें फैली कि लुक्का को किसी ने मरवा दिया | देहात की औरतें दहाड़मार कर रोतीं थी जब उनकी सीडी प्ले होती थी | हिचकियां लेलेकर कहतीं- बिचाये ने का बिगारौ काहू कौ सो मारि दयो, कितनो अच्छो हतो लुक्का… पर लुक्का मरा नहीं था, वो तो मुंबई चला गया था बड़ा वाला हीरो बनने | और उसने हीरो बनकर दिखाया | उनकी बडे पर्दे की हिंदी फीचर फिल्म – लल्लूराम उनके मुख्य अभिनय में रिलीज हो गई | जिसमें बडे-बडे बॉलीवुड के अभिनेताओं ने उनके साथ काम किया | और दूसरी फिल्म आधी-अधूरी रह गई, क्योंकि इस बार वो हकीकत में ही इस दुनिया को छोड़कर चले गये | नोएडा के एक अस्पताल में वे कैंसर से जंग हार गये |उनका जाना कलाक्षेत्र बृजभाषी और बॉलीवुड के फिल्म जगत के लिए बहुत बड़ी हानि है | इस हानि की भरपाई शायद ही हो पाये | मेरी स्वयं की तमन्ना थी उनके साथ काम करनेकी पर वह तमन्ना अधूरी रह गयी | बस अब तो स्मृतियों में ही रहेंगे – एक था लुक्का…|