आगरा

हुंडी बाजार में मचा है हडकंप विधायक गर्ग की गारंटी पर बाजार में उठा एक हजार करोड

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मिशन इंडिया न्यूज़ क्राइम संवाददाता – जितेंद्र सिंह

आगरा -बीजेपी के लगातार पांच बार विधायक रहे जगन प्रसाद गर्ग की अचानक मौत के साथ हुंडी कारोबार में करीब एक हजार करोड रुपये की भारी भरकम रकम डूब गई हैं। दरअसल जगन प्रसाद गर्ग के माध्यमम से तमाम अधिकारियों, चिकित्सकों और धन्नासेठों का रुपया आगरा और इस शहर के बाहर कई फर्मों में लगा है। जिनकी रकम डूब गई है, वे अब सकते में हैं। चूंकि यह पूरा लेनदेन भरोसे और परंपरागत तौर तरीके से होता है। अब जिनकी रकम डूबी है, उनसे जगन के परिजन ऐसे किसी भी प्रकार के हिसाब किताब के न होने की बात कह रहे हैं। इससे हुंडी कारोबार में हडकंप मच गया है।नोटबंदी के बाद आगरा के कई बडी फर्मों का कामकाज रसातल में चला गया था। विधायक जगन प्रसाद गर्ग भी इस चपेटे में आ गए थे। तब उन्हें भी नगदी के इधर उधर करने में खासी मशक्कत करनी पडी थी। जगन प्रसाद गर्ग ने इस काम में बाजार की बहुत मदद की थी। जगन प्रसाद गर्ग के होटल और डेरी का कारोबार उनके दोनों बेटे कई साल से संभालते हैं, पर रीयल स्टेट और हुंडी से जुडा कारोबार जगन जी खुद संभालते थे।आगरा में जगन प्रसाद गर्ग के पास कई प्लाट, कोठी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। विधायक बनने के बाद से जगन प्रसाद गर्ग रीयल स्टेट में उतर आए थे और दो दशक में उनका रीयल स्टेट कारोबार खूब फला फूला। जगन प्रसाद गर्ग पहले खुद हुंडी के जरिए बाजार से रुपये लेते थे और करीब एक दशक से उनके जरिए बाजार में दूसरे कारोबारियें तक रकम पहुंचने लगी थी।आगरा में हुंडी कारोबार के दो ग्रुप हैं। एक वैश्यों का दूसरा सिंधी-पंजाबियों का। वैश्य वर्ग को पंजाबी और पंजाबी को वैश्य हुंडी कारोबारी रकम नहीं देता है। ये दोनों अन्य किसी भी जाति या समाज का व्यक्ति कितना भी प्रतिष्ठित हो उसे भी रकम नहीं देते हैं। बहुत कम फर्म हैं जो वैश्य या सिंधी-पंजाबी नहीं हैं, पर अपनी फर्मों की कई पीढियों की साख के भरोसे एक सीमा तक हुंडी कारोबारियों से रकम ले पाते हैं।जगन प्रसाद गर्ग का बीते एक दशक से बडा कारोबार, हुंडी से जुडा था। इसमें विधायक जी की प्रतिष्ठा और साख की गारंटी लगी है। जिन हुंडी कारोबारियों की रकम बाजार में है, वे अपना लेखा जोखा विधायक के परिजनों को दिखा रहे हैं, पर परिजन ऐसे किसी हिसाब की उन्हें जानकारी न होने की बात कहकर हृदय की धडकन बढा रहे हैं।खुद जगन प्रसाद गर्ग पर बाजार का करीब सात करोड बकाया है। जगन के परिजन इस रकम का हिसाब उनके पास होने का तो संकेत दे रहे हैं। हुंडी कारोबार से जुडे सूत्र बताते हैं कि एक हजार करोड रुपये की तुलना में सात करोड रुपये बहुत छोटी रकम है। चूंकि जगन के दोनों बेटों को बाजार में आगे भी कारोबार करना है लिहाजा अपनी प्रतिष्ठा और प्रतिष्ठानों की साख बचाने के लिए इस रकम की हामी भर रहे हैं।कई फर्मों ने दिखाई नेक नीयती जिन कारोबारियों के पास जगन प्रसाद गर्ग के माध्यम से हुंडी बाजार में रकम है, उनमें से कई ने खुद संपर्क कर लेनदेन का हिसाब ईमानदारी से हुंडी कारोबारियों से स्वीकार रहे हैं। सूत्र कहते हैं, बाजार में ऐसी करीब 90 फीसदी फर्में होती हैं जो गारंटर की गैर मौजूदगी में रकम होना स्वीकारती हैं, पर रकम वापस कब तक और कितनी होगी, कह पाना मुश्किल होता है।