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जंगली पशुओं के आतंक से किसान परेशान

श्रावस्ती–  जंगली जानवरों के आतंक से किसान परेशान हैं। खेतों में लगी लैला हाथी फसलों को जंगली जानवर सफाचट कर रहे हैं। किसानों को जंगली जानवरों से शुरू होने वाले नुकसान का कोई मुआवजा भी नहीं मिलता है वन विभाग भी इसके लिए किसान को दोषी ठहरा रहा है। नेपाल के जंगलों से आने वाले जानवर वह भारत के जंगलों जानवर कोई भी फसल हो उसे नुकसान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते भारत नेपाल सीमा पर 452 वर्ग किलोमीटर सुहेलवा जंगल का क्षेत्रफल है। इस जंगल में सट्टे लालपुर कुसमहवा मदार गण घड़दौरिया भचकाही मोतीपुर गब्बा पुर सहित लगभग 4 दर्जन गांव में जंगली जानवरों का आतंक रहता है। खेत में पहुंचकर जंगली जानवरों के झुंड खड़ी फसल को कुचलकर नुकसान करके पहुंच रहे हैं। सोहेला 52 क्षेत्र के जंगलों सूअर भालू बंदर लंगूर चीतल भेड़िया प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। इनके अलावा मौजूद हाथी भी खेतों में खड़ी फसल को रौंद देते हैं। जंगली सूअर आलोक गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। गौरव तलब है कि जंगल की सीमा वार्ता क्षेत्र अशिक्षित है। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसान खेतों में रात गुजारने को मजबूर हैं। लेकिन इसके बाद भी उनकी फसलें सुरक्षित नहीं रह पाती हैं कटकुइया निवासी रामनरेश कहते हैं। की जानवरों से नुकसान हुई फसलों को मजा भी नहीं मिलता वन विभाग से इसकी शिकायत बार-बार की जाती है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती सैकड़ों एकड़ की छत के बारे में शिकायतों पत्र दिया जा चुका है। और जंगल के बीच की खाई दिन प्रतिदिन अतिक्रमण को शिकार होते जा रही है। इसलिए जानवरो को खेतों में पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि जैविक दबाव के कारण प्राकृतिक वास खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसलिए जानवर भोजन के लिए सीधे खेतों की ओर निकल रहे हैं।