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भुतहा रेलवे स्टेशन शाम होते ही पसर जाता है सन्नाटा कार्यालयो मे लग जाती है सील

 

एटा -क्या आपने ऐसा भी रेलवे स्टेशन देखा या सुना है जहाॅ शाम होते ही स्टेशन के कार्यालय सील कर दिए जाते है और सुवह इन कार्यालय की सील तोडकर इन्हे खोला जाता है रात्रि के समय स्टेशन पर जी आर पी सिपाहियो के अलावा कोई नही रहता देखने को तो यहाॅ स्टेशन अधीक्षक,स्टेशन मास्टर के सूचना पट लगे दिखाई देते है एटा से टूंडला जंक्शन तक चलने बाली एक मात्र ट्रेन के यात्रियो के लिए स्टेशन पर लघु शंका एवम शौचगृहो पर स्थाई ताला डाल दिया गया है इस रेलवे स्टेशन पर यात्रियो की सुविधा के लिए टेलीफोन सुविधा भी उपलब्ध नही है रेलवे स्टेशन पर कार्यरत सहायक स्टेशन मास्टर जो एटा के निकटवर्ती क्षेत्र के रहने बाले है ने यहाॅ के कर्मचारीगणो पर अपने अपने मोबाइल फोन है और यह नंबर हम किसी को उपलब्ध नही कराते कई आन्दोलन करने के बाद एटा के इस भुतहा रेलवे स्टेशन को एटा से आगरा तक फास्ट पैसेंजर ट्रेन चलाई गई थी जिसका संचालन लगभग एक बर्ष से बंद कर दिया गया है कई बार एटा की जनता ने आबाज उठाई कि एटा रेलवे स्टेशन को देहली लखनऊ से जोडकर ट्रेन संचालित की जाए तो यहाॅ का रेलवे स्टेशन आबाद हो सकता है लेकिन जन भावनाओ को नजर अंदाज कर दिया गया कई बार एटा रेलवे स्टेशन को कासगंज जंक्शन से जोडने के लिए सर्वे भी कराऐ गये लेकिन कार्य अभी तक शुरू नही हो सका भारतवर्ष के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी द्वारा उद्धघटित  एटा का रेलवे स्टेशन अपनी बिकास की बाट जोह रहा है देखना है कि कब तक इस रेलवे स्टेशन का बिकास हो पाता है।